Sushant Singh Rajput | Girlfriend

क्यों की सुशांत सिंह राजपूत ने ख़ुदकुशी? क्या है उनकी गर्लफ्रेंड और करीबीयों का कहना

बॉलीवुड

नमस्कार दोस्तो: 34 साल के उभरते सितारे सुशांत सिंह राजपूत ने आखिर खुदकुशी क्यों की? क्या वे डिप्रेशन में थे या उन्हें कुछ लोगों ने ऐसा करने पर मजबूर किया? इन सब बातो के बीच सुशांत सिंह राजपुत कि गर्लफ्रेंड और उनके करीबीयो का क्या कहना है इन सभी बातो को जानते है विस्तार से। इसके पहले आपको बतादे कि इस गुत्थी को सुलझाने में मुंबई पुलिस ने जांच तेज कर दी है। सुशांत के परिवार और फैंस का ऐसा मानना है कि वे आत्महत्या करने वालों में से कतई नहीं थे, उन्हें उकसा कर ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया है। अब उन्हें न्याय दिलाने के लिए ऑनलाइन पिटीशन चल रही है और मुकदमा भी दायर किया गया है।

Sushant Singh Rajput | Girlfriend

ख़ास बाते

  • सबसे बड़ा आरोप यह कि सुशांत के पास 7 फिल्मों के ऑफर थे, लेकिन 6 उनसे छीन लिए गए
  • पुलिस भी जांच कर रही है कि, कहीं सुशांत बॉलीवुड की खेमेबाजी का शिकार तो नहीं बन गए
  • करन जौहर ने फोन नंबर बदल लिया और आलिया समेत कई दोस्तों को अनफॉलो कर दिया

क्यों की सुशांत सिंहराजपूत ने ख़ुदकुशी

आपको बतादे कि कांग्रेस नेता संजय निरुपम पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सुशांत से फिल्में छीने जाने की बात उठाई। इसके बाद महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख, मंत्री जितेंद्र आव्हाड, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी मामले को उठाया। 

34 साल के इस एक्टर के अतीत को, जो अपने पीछे नोट छोड़कर नहीं गए लेकिन उन्होंने अपने पीछे कुछ शब्द छोड़ दिए थे जिनको अब शायद हि कोई पुरा कर सकेगा। कुछ आकृतियां, कुछ विचार छोड़े थे और इनमें से ज़्यादातर उन चीज़ों के बारे में थे, जो उन्होंने अंतरिक्ष में देखे थे। स्पेस की उनकी यह यात्रा उनकी उन अधूरी-सी कविताओं में सिमट गई थी, जिन्हें वो अपने ‘ख़यालात’ कहा करते थे। वह साइंस में डूबे रहने वाले शख़्स थे। वे कविताए भी लिखते थे वह आधे कवि भी थे।

साइंस में भी थी गहरी रुची

सुशांत सिंह के बारे में दिल जानने को इच्छुक हो तो उनकी पढ़ी हुई चीज़ों से कुछ सुराग़ मिल सकता है। उन्होंने जो देखा उसे देखकर ही आप उनके बारे में कुछ समझ सकेंगे। सुशांत को पता था कि शनि ग्रह के छल्ले धूमकेतुओं के टुकड़े, छोटे तारों या इसके सशक्त गुरुत्वाकर्षण से चकनाचूर चांदों के टुकड़े हैं। यह तो बर्फ़, पत्थर और धूल हैं।

उन्होने  ने फ़िलीप रोथ को पढ़ा था, वाल्डो इमर्सन को भी, वह ईई कमिंग्स के कोट किया करते थे। वह रात में अनंत की ओर देखा करते थे. वह कहा करते थे कि तारे किस तरह अंतरंग होकर एक दूसरे को गले लगा रहे हैं। सुशांत को पीटर प्रिंसिपल नाम के कॉन्सेप्ट के बारे में अच्छे से पता था। उनके पास 200 किलो का एक मोडर्न टेकनोलॉजी टेलीस्कोप भी था। उन्होंने आसमान की मैपिंग की थी। उन्हें याद्दाश्त चले जाने के बारे में पता था। वह ब्लैक होल और चांद के गड्ढों को बारे में जानते थे।

सुशांत शांत स्वभाव के व्यक्ति थे

सुशांत एक ऐसे व्यक्तित्व के धनी थे, जो हमारे सामने थोड़ा खुले भी थे और थोडा बंद भी। उनमें कई चीज़ों का मेल दिखता था। यह एक ऐसे सफल व्यक्ति की कहानी थी, जो जिंदगी के सफर में असफल  रहा और जिसको हमने तवज्जो नहीं दिया।

ख़ुदकुशी के बाद कई लोगों ने उनके बारे में कई चीज़ें लिखीं। किसी ने ख़ुदकुशी के तरीक़े के बारे में लिखा, तो कुछ ने इसकी वजह बताई। उसकी मौत की साज़िश के बारे में बातें हुईं। पुलिस की पूछताछ और डॉक्टरों पर बयानों को लेकर भी चर्चा हुई।

आपको बतादे कि उनकी ख़ुदकुशी को लेकर कई लॉबियाँ खड़ी हो गईं। भाई-भतीजावाद (Napotism) का नया मामला सामने आ गय।। बिहार के मुज़फ्फ़रपुर में बॉलीवुड के एक्टर्स और डायरेक्टरों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी दर्ज हुई। एफ़आईआर में आरोप लगाया गया कि सुशांत को कुछ लोगों ने ख़ुदकुशी के जैसी पॉज़िसन पर लाकर खडा कर दिया था। कुछ ने कहा कि पहले उन्हें प्रेम में फंसाया गया और फिर धोखा दे दिया गया।

सुशांत की उपलब्धियों पर नज़रिया

Bollywood इंडस्ट्री से बाहर का होना और परिवारवाद (Napotism) का शिकार होने जैसे तर्कों से हम सुशांत की उपलब्धियों पर अपना नज़रिया छोटा कर लेते हैं| तमाम कठिनाइयों के बावजूद उनकी सफलता को प्रति यह असम्मान प्रकट करने जैसा है|

सुशांत, निजी तौर पर नवाज़ुद्दीन सिद्दिक़ी को पसंद करते थे| लेकिन उन्हें नवाज़ुद्दीन की तरह  कठोर संघर्ष नहीं करना पड़ा। उन्हें उस छवि को साथ लेकर संघर्ष नहीं करना पड़ा, जिन्हें स्थायी रूप से ग़रीब आदमी की भूमिका के लिए फ़िट माना जाने लगा।

कई साल पहले नवाज़ुद्दीन ने मुझ एक इंटरव्यू में कहा था, “मुझे अपने संघर्षों पर ग़ुस्सा आता था मुझे हर चीज़ पर ग़ुस्सा आने लगा था।” एक वक़्त था जब कोई भी उन्हें गंभीरता से नहीं लेता था। जब वह कहते थे कि उन्हें लीड रोल चाहिए तो उनके साथी यह कहकर उन्हें ख़ारिज कर देते थे कि “तुम हीरो मैटेरियल नहीं हो।”

उस इंटरव्यू के दौरान उन्होंने मुझसे कहा था कि “मैं एक दिन बॉलीवुड का सबसे ज़्यादा फ़ीस लेने वाला बडा एक्टर बनना चाहता हूँ”। और आपको बतादे कि बॉलीवुड में संघर्ष रहा है। कुछ इसे झेलने में नाकाम रहे, जैसे अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर लेकिन नवाज़ुद्दीन जैसे लोगों ने संघर्ष कर जगह बनाई। सुशांत सिंह राजपूत ने भी इसी संघर्ष को एक नया शब्द कामयाबी बनाकर Bollywood  में अपनी जगह बनाई।

एकांतप्रिय सुशांत का संघर्षमय जीवन

सुशांत सिंह  राजपुत का जन्म बिहार के पूर्णिया ज़िले के मलडीहा में 1986 में हुआ था। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे सुशांत। सभी बहनें, सिर्फ़ एक भाई। अपनी मां के बेहद क़रीब। वह शांत रहने वाला बच्चे थे। 2003 में मां की मौत का उस पर गहरा असर रहा। वह हमेशा एकांतप्रिय रहा।

सुशांत के परिवार की नज़दीकी रंजीता ओझा कहती हैं कि वह अपनी मां के बहुत क़रीब थे। मां की याद उन्हें बहुत सताती थी। हंसराज स्कूल में दाख़िले के लिए वे दिल्ली के मुखर्जी नगर आ गए थे, अपनी बहन के साथ रहने लगे। बहन यहीं रहकर सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करती थीं। सुशांत ने डेल्ही कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया था। वह हमेशा मुस्कुराते रहते। रंजीता को उनकी यही मुस्कुराहट हमेशा याद आती है। या तो वे पार्क में अकले घूमते या फिर अपनी पढ़ने की मेज़ पर होते।

करियर मे ऐसे हुए थे सफल – सुशान्त

बतादे कि उन्होंने बेरी जॉन के एक्टिंग स्कूल में एक्टिंग भी सीखी थी। बाद में वे नादिरा बब्बर के एक ‘एकजुट थियेटर’ से भी जुड़े। सुशांत जब कॉलेज लाइफ में थे तो उन्होंने अपनी सबसे बड़ी बहन को फ़ोन करके कहा था कि वे डांस करना चाहते हैं।

उनके एक पारिवारिक मित्र ने बताया कि उस दौरान उनकी बहन ने सुशांत कि मदद की थी। बड़ी बहन ने पिता को नहीं बताया कि सुशांत डांस करने के लिए मुंबई गए हैं। पिता को उन्होंने यह बताया कि वह इंटर्नशिप पर मुंबई में हैं। जल्दी ही सुशांत को नोटिस किया जाने लगा और फिर ‘किस देश में रहता है मेरा दिल‘ से उनका टीवी का करियर शुरू हुआ। फिर वे एकता कपूर के सीरियल ‘पवित्र रिश्ता’में लीड रोल में काफी समय तक रिश्ते कि डोर को मजबुत करते दिखे।

2011 का समय आया और उन्होंने बॉलीवुड पर नज़रें टिकाईं, जहाँ फ़िल्म इंडस्ट्री से ताल्लुक़ रखने वाले रणवीर सिंह, वरुण धवन, रणवीर कपूर जैसे स्टार मौजूद थे। परिवार का फ़िल्मी बैकग्राउंड हो तो करियर में दूसरा या तीसरा चांस भी मिल जाता है। कई बार ब्रेक मिल जाते हैं। लेकिन फ़िल्मी दुनिया के बिल्कुल बाहर वाले शख्स के लिए तो सिर्फ़ एक मौक़ा मिलता है।

मगर सुशांत की पहली ही फ़िल्म सफल रही। इसके बाद आई मनीष शर्मा की ‘शुद्ध देसी रोमांस'(2013)।

इसके बाद उन्होंने राजकुमार हिरानी की फ़िल्म ‘पीके’ (2014) में उन्होंने सरफ़राज की भूमिका निभाई जो कि सुपरहिट रही। इसके बाद सुशांत को यशराज फ़िल्म ने साइन किया और उन्हें दिबाकर बैनर्जी की ‘डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी’ फ़िल्म मिली।

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