विकास दुबे ने पूछताछ में मददगार पुलिसवाले समेत इन बडे नेताओं के नाम कबूले

UP का गैंगस्टर विकास दुबे गुरुवार को उज्जैन में पकड़े जाने के बाद काफी सहमा हुआ था। डर इअतना था कि विकास दुबे ने उज्जैन से कानपुर तक के 12 घंटे जीवन के अंतिम सफर में रातभर निंद उसकी आंखो में नही आई । शायद उसे इस बात का डर सता रहा था कि पुलिस कुछ बडा गेम खेल सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस सफर में विकास से UP STF ने कई तरह से अलग- अलग सवाल किए।

कुछ महीने- सालभर में जमानत मिल जाएगी

पुलिसीया सवालो के जवाब देते समय उसके चेहरे पर कोई घबराहट भी नहीं थी। विकास ने 50 से ज्यादा पुलिस अफसरों और कर्मचारियों के नाम बताए, जो हमसफर कि तरह मदद कर रहे थे। कानपुर, उन्नाव और लखनऊ के बड़े नेताओं के नामों का भी विकास ने बताए। चेहरे पर  मुस्कान लिए विकास ने कहा- गुस्से में बिकरु कांड हो गया। आप लोग पुलिसवाले जेल भेज भी देंगे तो कुछ महीने या सालभर में जमानत मिल जाएगी और फिर बहार आ जाउंगा।

इन 11 विधायकों, मंत्रियों का नाम लिया

सूत्रो का कहना हैं कि गिरफ्तारी के बाद उज्जैन से कानपुर लौटते समत विकास दुबे ने एसटीएफ को कानपुर के चार बड़े कारोबारियों, 11 विधायकों, दो मंत्रियों के नाम लिए हैं, जिनसे उसके घनिष्ठ संबंध थे। अपनी सारी संपत्ति और फंडिंग के बारे में भी जानकारी दी। सूत्र यह भी बताते हैं कि एसटीएफ ने उसके बयान का वीडियो भी बनाया है, जो ईडी को सौंपा जा चुका है। इसके बाद ही ईडी सक्रिय हुई है।


किस मददगार पुलिसवाले की कहां पोस्टिंग, यह भी बताया था

विकास दुबे ने एनकाउंटर से पहले अपने कबूलनामे में कई मददगारों के नाम पुलिस को सामने रखे। कहा था कि 50 से ज्यादा पुलिसवालों ने उसकी अब तक मदद की है। इसमें तीन एडिशनल SP और दो IPS अफसरों के नाम भी शामिल हैं। यहीं नहीं, उसे जुबानी सभी के नाम याद थे और कौन कहां पोस्ट है, यह भी बताया था।

विकास ने कानपुर, उन्नाव और लखनऊ के कई नेताओं के नाम लिए। उसने दिवंगत सीओ देवेंद्र मिश्र से अपने गुस्सा का किस्सा भी खोला। कहा कि सीओ उसे हद में रहने की बात करते थे। लेकिन, वह चाहता था कि उसके गांव, आसपास के इलाके और थाने पर सिर्फ उसका ही राज चले। पुलिस का दखल उसे पसंद नहीं था।

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अन्य पुलिसवालों को क्यों मारा?

सीओ से गुस्सा था, अन्य पुलिसवालों का क्या दोष था? इस सवाल के जवाब में विकास ने खेद जताया। उसने कहा कि गुस्से में इतना बड़ा कांड हो गया। लेकिन इतनी बड़ी कार्रवाई हो जाएगी, इसका भी अंदाजा नहीं था। उसे लग रहा था कि उसके ‘खास लोग’ उसे बचा लेंगे। रास्ते में वह कई बार खुद पुलिसवालों से पूछता रहा कि आगे क्या करने वाले हैं। विकास को लगता था कि पुलिस उसे जेल भेजेगी। इसीलिए वह निश्चिंत था कि कुछ महीने या सालभर में जमानत पर जेल से बाहर आ जाएगा। 

21 नामजद में से 12 अभी भी फरार

अब तक विकास के अलावा उसके करीबी प्रभात, बऊआ, अमर दुबे, प्रेम प्रकाश पांडे, अतुल दुबे का एनकाउंटर हो चुका है। नामजद में 21 आरोपियों में से 12 अभी फरार हैं। वहीं, चौबेपुर के एसओ रहे विनय तिवारी, दरोगा केके शर्मा समेत 12 लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है।

कानपुर के चौबेपुर थाना के बिकरु गांव में 2 जुलाई की रात गैंगस्टर विकास और उसकी गैंग ने 8 पुलिसवालों की हत्या कर दी थी। अगली सुबह से यूपी पुलिस विकास गैंग के सफाए में जुट गई। गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर से सरेंडर के अंदाज में विकास की गिरफ्तारी हुई थी। शुक्रवार सुबह कानपुर से 17 किमी पहले पुलिस ने विकास को एनकाउंटर में मार गिराया।

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