Story of Baba Khatushyam

खाटूश्याम के दरबार का जादू, आखिर क्यों जाते है उनके दर्शन के लिए इतने श्रद्धालु

धर्म

बाबा खाटूश्याम:  आज हम आपको बताने वाले है भगवान खाटूश्याम के इतिहास के बारे में ,की आखिर लाखो तादात में श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए क्यों जाते है|  बतादे कि खाटूश्याम का दरबार राजस्थान के सीकर जिले के गांव खाटू में स्थित है| भगवान खाटूश्याम को पूरी दुनिया में शीश के दानी के नाम से जाना जाता है। इन्हें हारे का सहारा, बाबा खाटूश्याम हमारे के नाम से भी जाने जाते है| सिलीगुड़ी में प्रतिवर्ष बाबा श्याम का उत्सव बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। ज्यादातर श्याम भक्त इनके संबंध में विस्तार में नहीं जानते? कि कौन है बाबा खाटू श्याम। ऐसे में खाटू श्याम कौन है यह जानना जरुरी है।

Story of Baba Khatushyam

Story of Baba Khatushyam….  

जानकारी के अनुसार आपको बतदे कि कौरव वंश के राजा दुर्योधन ने निर्दोष पांडवों को सताने और उन्हें मारने के लिए लाक्षागृह का निर्माण कराया था। वहां से भी वे सभी सौभाग्यवश बच निकले। उसके बाद वे सभी वनवास में रहने लगे। एक समय वन में हिडम्बासुर नामक राक्षस अपनी बहन हिडिम्बा सहित पहुंचा। उसे पांडवों की गंध आई तो वह बहन से बोला कि मनुष्यों को मारकर मेरे पास ले आओ। भाई के आदेश से वह वहां पहुंची जहां सभी भाई द्रौपदी सहित सभी सो रहे थे। उनकी रक्षा में भीम तत्पर था।

हिडिम्बा भीम के स्वरुप पर मोहित हो गई। उसने भाई की परवाह किए बिना ही भीम को अपना पति मान लिया। जब वहां हिडिम्बासुर पहुंचा तो बहन को सुंदर स्त्री के रुप में देख क्रोधित हो गया। भीम के साथ हिडिम्बा का गंधर्व विवाह हुआ। हिडिम्बा गर्भवती हुई और पुत्र को जन्म दिया। बाल रहित होने के कारण उसका नाम घटोत्कच रखा गया। उसके बाद भीम को छोड़कर हिडिम्बा चली गई। उसके बाद घटोत्कच भी वहां से चला गया। जल्द ही श्रीकृष्ण के कहने पर मणिपुर में मुरदेत्य की लड़की कामकंटका से उसका विवाह हुआ। उसका नाम बर्बरीक रखा। बल की प्राप्ति के लिए उसने देवताओं और देवियों की अराधना कर तीनों लोकों में दुर्लभ बल प्राप्त किया। उसके बाद देवियों ने उससे कहा कि विजय नामक एक ब्राह्म्ण आएंगे जिससे तुम्हारा कल्याण होगा। बर्बरीक को ब्राह्म्ण के बताए मार्ग पर शक्ति की प्राप्ति हुई। बर्बरीक ने साधना में विध्न डालने वाले सभी राक्षसों को यमलोक भेज दिया। असुरों को मारने पर नागो के राजा बासुकी आए और बर्बरीक से वरदान मांगने को कहा। बर्बरीक को युद्ध में विजय होने का वर प्राप्त हो गया। उसके बाद उसका नाम सिद्धसेन हो गया।

कुछ दिनों बाद कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध की तैयारी प्रारंभ हुई। इस अवसर पर बर्बरीक नीले घोड़े पर सवार होकर चले। रास्ते में श्रीकृष्ण ने बर्बरीक की परीक्षा लेने के लिए ब्राह्म्ण वेष में पहुंचे। युद्ध के संबंध में जब पूछा कि तुम किसकी ओर से लड़ना चाहते हो तो उसने कहा जो कमजोर होगा उसके पक्ष में। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम तीन ही बाणों से सारी सेना को कैसे नष्ट कर सकते हो? तब बर्बरीक ने कहा सामने वाले पीपल वृक्ष के सभी पत्ते एक ही बाण से निशान बनाएगा और दूसरा उसे बेध देगा। वह परीक्षा में भी उत्तीर्ण हो गया। कृष्ण को लगा कि यह तो एक ही बाण से सभी को यमलोक भेज सकता है। तब ब्राहम्ण बने कृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि मैं जो मांगू मिल जाएगा। बर्बरीक ने हां कह दिया। उसके बाद श्रीकृष्ण ने उसका शीश दान में देने को कहा।

बर्बरीक समझ गया कि यह कोई ब्राह्म्ण नहीं है। उसके बाद भगवान ने अपना विराट स्वरुप दिखाया और कहा कि अगर तुम युद्ध में जाते तो दोनो कुल पूर्णतया नष्ट हो जाते। इसलिए यह करना पड़ा। उसने अपना शीश देने को राजी हुआ और कहा कि मैं युद्ध देखना चाहता हूं। उसके बाद अमृत जड़ी से उसे पर्वत शिखर पीपल पर स्थापित किया। 18 दिनों के युद्ध के बाद पांडवों की जीत हुई। पांडवों को अपनी जीत पर घमंड था तब श्रीकृष्ण ने सबको बर्बरीक के शीश के दर्शन कराएं। बर्बरीक ने कहा कि यह जीत श्रीकृष्ण के नीतिज्ञ की है। उसके बाद श्री कृष्ण ने वरदान दिया कि कलयुग में मरे श्याम नाम से तुम्हारा सुमरन करने से सभी मनोरथ पूरे हो जाएंगे।

इस दिन से बाबा खाटूश्याम का मेला लगाने वाला है  

27 फरवरी 2020 – गुरूवार (चतुर्थी तिथि )

28 फरवरी 2020 – शुक्रवार (पंचमी)

29 फरवरी 2020 – शनिवार (पंचमी )

1 मार्च 2020 – रविवार (षष्ठी )

2 मार्च 2020 – सोमवार (सप्तमी )

3 मार्च 2020 – मंगलवार (अष्टमी )

4 मार्च 2020 – बुधवार (नवमी )

5 मार्च 2020 – गुरूवार (दशमी )

6 मार्च 2020 – शुक्रवार (एकादशी )

7 मार्च 2020 – शनिवार ( द्वादशी )

हरे का सहारा बाबा खाटूश्याम हमारा

एक भजन बाबा खाटूश्याम के प्रेमियो के लिए

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