नयी शिक्षा नीति नए भारत की मजबुत नींव होगी, PM मोदी ने बताई 10 बातें

National Policy on Education: आपको बतादे कि देश में नई शिक्षा नीति New education policy का ऐलान हो गया है। ऐसे नई शिक्षा नीति पर आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए PM Modi  ने कहा कि बीते कई वर्षों से हमारे शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं हुए थे। परिणाम यह उम्मिद से कम आया उसका रेज़ल्ट यह  हुआ कि हमारे समाज में उत्सुकता और कल्पनाशीलता को बढ़ावा देने के बजाए भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था।

New education policy 2020

NPE  भारत की मजबुत नींव होगी

PM Modi ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NPE (National Policy on Education) के संदर्भ में आज का ये program बहुत मायना रखता है| इस कॉन्क्लेव से भारत के शिक्षा जगत को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Policy on Education) के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी।

National Policy on Education के प्रसंग में आज का यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। इस कार्यक्रम से भारत के शिक्षा जगत को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेना तय है जो नए भारत कि मजबुत नीव के पत्त्थर के रुप मे कार्य करेगा।

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जितनी जानकारी स्पष्ट होगी, उतनी ही आसानी से इसका समंवय भी होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से यह बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का भेदभाव है, या किसी एक पक्ष कि ओर झुकी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति को अमल में लाने के लिए हम सभी को एकसाथ आगे आकर संकल्प के साथ काम करना है। हम उस युग की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां कोई व्यक्ति जीवन भर किसी एक प्रोफेशन में ही नहीं टिका रहेगा।

मोदी ने बताई National Policy on Educatio कि 10 बातें

  1. कुछ लोगों के मन में ये सवाल आना लाजमी है कि इतना बड़ा सुधार कागजों पर तो कर दिया गया, लेकिन इसे जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। यानि अब सबकी निगाहें इसके कार्य में कैसे लाया जाए की तरफ है।
  2. आज गुरुदेव रबीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि भी है।  और उनका कहना था – “उच्चतम शिक्षा वह है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती, बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।” निश्चित तौर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बृहद लक्ष्य इसी से जुड़ा है। 
  3. हमारे छात्रों में, हमारे युवाओं में क्रिटिकल थिंकिंग और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है, जब तक हमारी शिक्षा में उत्साह, शिक्षा का दर्शन, उद्देश्य न हो। 
  4. आज मुझे संतोष है कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया है।  वक्त के बदलाव के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है।  एक नया वैश्विक मानक भी तय हो रहा है। 
  5. आज मुझे संतोष है कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बनाते समय, इन सवालों पर गंभीरता से काम किया गया है।  वक्त के बदलाव के साथ एक नई विश्व व्यवस्था खड़ी हो रही है।  एक नया वैश्विक मानक भी तय हो रहा है। 

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  1. इसके हिसाब से भारत का एजुकेशन सिस्टम खुद में बदलाव करे, ये भी किया जाना बहुत जरूरी था। स्कूली शिक्षा में  10+2 के स्वरूप से आगे बढ़कर अब 5+3+3+4 का स्वरूप देना, इसी दिशा में एक कदम है।
  2. हमें हमारे छात्रों को ग्लोबल सिटिजन तो बनाना है, इसका भी ध्यान रखना है कि वह इसके साथ अपनी मुल आधार नितियो से भी जुड़े रहें।  जड़ से जग तक, मनुज से मानवता तक, अतीत से आधुनिकता तक, सभी बिंदुओं का समावेश करते हुए, इस राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्वरूप तय किया गया है।
  3. इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है।  यह एक बहुत बड़ी वजह है, जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, पांचवी कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है। 
  4. अब कोशिश ये है कि बच्चों को सीखने के लिए खोजपरक, जांचपरक, बहस और विश्लेषण के तरीकों पर जोर दिया जाए। इससे बच्चों में सीखने की ललक बढ़ेगी और उनके क्लास में उनकी भागीदारी भी बढ़ेगी। 
  5. हर विद्यार्थी को यह अवसर मिलना ही चाहिए कि वो अपने रुचि के हिसाब से चले।  वो अपनी सुविधा और ज़रूरत के हिसाब से किसी डिग्री या कोर्स को कर सके और अगर उसका मन करे, तो वो छोड़ भी सके। 

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