Janak palta solar kichen

मध्यप्रदेश का पहला सोलर किचन बनाया Janak palta दीदी ने, सभी गाँव वाले की बदल दी तक़दीर

मध्यप्रदेश

नमस्कार दोस्तों: भारत रत्न ने सम्मानित Janak palta (दीदी) के सौर ऊर्जा से संचालित घर में अब तक 85,000 लोग आकर सस्टेनेबल लिविंग के गुर सीख कर आज अपने ही घर में और आस – पास के लोगो को सोलर कुकर से खाना पकाना और पुरे  गाँव की बिजली सोलर से ही चलती हैं।

Janak palta awarded

ये कहानी उस औरत की है जिसने लाख परेशानियों को सहने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और डटी रही। वह समाज सेवा की एक ऐसी मिसाल बनकर उभरी की उन्हें भारत सरकार द्वारा साल 2015 में देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक अलंकरण सम्मान पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

कोरोना वायरस से गबराएं नहीं, प्रशासन ने इसके लिए हेल्पलाइन नबंर जारी किया है

Janak palta का परिचय..

हम बात कर रहें हैं डॉ जनक पलटा (Janak palta) मगिलिगन की, जो आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। वह इंदौर के सनवादिया गाँव में रहती हैं और सौर ऊर्जा पद्धति पर बने अपने घर में रहकर हज़ारों लोगों को ट्रेनिंग दे रही हैं। वह अपने वर्षों से संचित ज्ञान को दुनियाभर में निःस्वार्थ भाव से बांटने का काम कर रही हैं।

‛द बेटर इंडिया’ से बात करते हुए वह बताती हैं, “मैं 72 वर्ष की हूँ और चंडीगढ़ में पली बढ़ी। साल 1985 में मैं आदिवासी महिलाओं के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने के लिए इंदौर गई। इस कार्य के लिए मुझे बहाई संस्था द्वारा भामोरी में 6 एकड़ जमीन दी गई। मैनें यहां 3 साल तक काम किया, जिसकी शुरुआत अकेली रहकर चारदीवारी निर्माण से हुई।

खुद का इंस्टीट्यूट बनाया और शिक्षा दी

धीरे-धीरे इंस्टीट्यूट बनकर तैयार हुआ और मैं इस दौरान गाँव में ही काम करती रही। इस इंस्टीट्यूट में 15 साल से अधिक उम्र की आदिवासी लड़कियां, महिलाएँ और जनजातीय क्षेत्र की महिलाएँ थी जो कभी स्कूल नहीं गई थीं।

इस इंस्टीट्यूट को 15 सालों बाद एक एनजीओ बनाने का अधिकार देते हुए पूरी स्वायत्तता दी गई। इसका नाम ‛बरली ग्रामीण महिला विकास संस्थान’ रखा गया। आदिवासी घर में छत के बीच में जो आधार स्तंभ होता है, उसे भिलाली (भील) बोली में ‘बरली’ कहते हैं। जनक दीदी का मानना है महिलाएँ ही परिवार और समाज की बरली हैं। उन्होंने 26 वर्षों तक बरली ग्रामीण महिला विकास संस्थान के निदेशक के रूप में सेवा दी। यहां गाँव की जरूरतें, गाँव की जीवन शैली, संस्कृति के आधार पर पाठ्यक्रम बनाए गए, जिसमें साक्षरता, स्वास्थ्य, अपना और अपने समुदाय का विकास, सिलाई-कढ़ाई और ब्लॉक प्रिंटिंग जैसे विषय थे।

राहुल गांधी का फिर विवादित बयान बोले – असम को RSS की चड्डी वाले नहीं चलाएंगे..

जनक दीदी ने कुछ दिनों बाद उत्तरी आयरलैंड के बहाई सेवक जिम्मी मगिलिगन से शादी की। फिर वह भी इसी सेंटर में मैनेजर के रूप में जुड़ गए।

अपने घर की महिलाओं को ट्रेनिंग

जनक दीदी पर जब गाँव के लोगों का भरोसा बढ़ने लगा तो उन्होंने अपने घर की महिलाओं को ट्रेनिंग के लिए भेजना शुरू किया। धीरे-धीरे जब इंस्टीट्यूट की महिलाएँ साक्षर हुईं तो उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग के माध्यम से परीक्षाएं दीं। 6 महीने तक उन महिलाओं को निशुल्क खाना-पीना, ट्रेनिंग, रहने की व्यवस्था मुहैया कराई जाती थी। दानदाता संस्थाओं की सहायता से सब चलता रहा। 6 एकड़ के इस परिसर को कुछ ऐसे बनाया गया था कि अपनी जरूरत की सभी वस्तुएं वहीं उगाकर खानी थीं। पर्यावरण को ध्यान में रखकर 900 पेड़ लगाए गए थे। वहां कोई भी, किसी भी तरह का कोई कचरा नहीं करता था।

Janak palta ने सोलर एनर्जी को बनाया लोकप्रिय

जनक दीदी सोलर एनर्जी का इस्तेमाल रोजमर्रा के काम में करना चाहती थीं। धीरे-धीरे सोलर किचन बनाने में उन्हें और उनके पति जिम्मी को सफलता मिली। ये मध्य भारत का पहला सोलर किचन था। 150 लोगों के लिए सुबह-शाम सोलर किचन की मदद से भोजन बनता था। उस किचन को देखने के बाद महिलाओं में इच्छा जाग्रत हुई कि उनके घरों में भी ऐसा ही सोलर कुकर होना चाहिए। स्थानीय दानदाताओं के सहयोग से 500 ट्रेनी महिलाओं को सोलर कुकर दिए गए।

सोलर कुकर के उपयोग को लेकर जब महिलाओं की प्रतिक्रिया जानी गई तो उनमें से एक ने बताया कि प्रेग्नेंसी के एडवांस स्टेज में जब महिलाएं लकड़ी का बहुत बड़ा गट्ठर लेकर चलतीं थीं तो उनमें से कुछ का मिसकैरेज भी हो जाता था, ऐसे में सोलर कुकर वाकई फायदेमंद साबित हुआ। सोलर कुकर का इस्तेमाल कर महिलाओं ने पीने का पानी उबालकर पीना शुरू किया और बच्चों को भी पिलाया। इससे बच्चों को पानी से होने वाली दस्त-उल्टी की बीमारियों में बड़ी राहत मिली।

Source: दुनिया की सबसे महंगी 14 करोड़ की Karlmann King SUV Car जिसके बारे में जानने से आपके होश उड़ जाएंगे

Leave a Reply