Important decisions of Supreme Court, 11 days left for CJI to retire

सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले, सीजेआई के सेवानिवृत होने मे 11 दिन बाकी

देश

नमस्कार दोस्तो; हम सब को पता है कि, अयोध्या राम मंदिर जन्मभूमि विवाद, सबरीमाला मंदिर में दस से पचास वर्ष की महिलाओं के प्रवेश न होने का मामला, राफेल लड़ाकू विमान सौदा|

भारत देश के प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना और भारत के प्रधान न्यायाधीश के दफ्तर में सूचना का अधिकार लागू होने का मुद्दा पांच ऐसे हि मामले हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Important decisions of Supreme Court) चार दिनो मे आने वाला है। ये पांचों ऐसे गम्भीर मामले हैं जिनका बहुत बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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इन गम्भीर मामलों की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने की है।भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को सेवानिवृत हो रहे हैं। ऐसे मे छुट्टियां निकाल दी जाए तो जस्टिस गोगोई के पास इन मामलों में फैसला सुनाने के लिए मात्र चार दिन बचेंगे।

प्रधान न्यायाधीश के सेवानिवृत होने में 11 दिन बाकी

जानकारी के अनुसार आपको बता दे कि वैसे तो भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के सेवानिवृत होने में अभी कुल 11 दिवस बाकी हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Important decisions of Supreme Court) की सूचना के मुताबिक गुरुवार को इनमें से किसी भी मामले में फैसला नहीं होगा|

ऐसे में इन 5 मुकदमों के फैसले के लिए मात्र 4 दिन बाकी हैं, लेकिन सामान्यतौर पर कोर्ट कार्यदिवस पर ही फैसले सुनाता है।

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पहला फैसला- अयोध्या राम मंदिर

आपको बताते चले कि, सुप्रीम कोर्ट (Important decisions of Supreme Court) ने अयोध्या राम मंदिर जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुकदमें में सुनवाई पूरी करके पिछले माह 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुनाया था। भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 न्यायाधीशों की पीठ ने 40 दिनो कि कठोर  सुनवाई करने के बाद फैसला सुनाया था।

Important decisions of Supreme Court, 11 days left for CJI to retire

दूसरा फैसला- जस्टिस गोगोई के आफिस में आरटीआइ


सुप्रीम कोर्ट का दूसरा फैसला इस मुद्दे पर है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गोगोई का दफ्तर सूचना कानून के दायरे में आएगा या नहीं। इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए सुनवाई के दौरान कहा था की, किसी भी व्यवस्था को अपारदर्शी बनाए रखने का पक्षधर नहीं है लेकिन एक संतुलन कायम करने और एक रेखा खींचने की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट और सीआइसी ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का दफ्तर सार्वजनिक अथारिटी माना जाएगा और इन सभी सूचना का अधिकार कानून उस पर लागू होना चाहिये।

Important decisions of Supreme Court, 11 days left for CJI to retire

तीसरा फैसला- सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश

आप सभी को पता हि होगा की हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष 28 सितंबर को केरल के सबरी माला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव ठहराते हुए महिलाओ के प्रवेश को रद्द कर दिया था।

महिलाओं पर यह रोक उनके मासिक धर्म के कारण कि गयी थी। यह फैसला 4-1 के बहुमत से था। इस फैसले मे जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने उन बहुमत से असहमति जताई थी। इस फैसले का अयैप्पा अनुयायी बहुत भारी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि, ’मंदिर के भगवान अयैप्पा ब्रम्हचारी हैं|

और 10 से 50 वर्ष कि आयु वाली महिलाओं के प्रवेश से इस मंदिर की प्रकृति बदल जाएगी। इस  फैसले के खिलाफ कुल 55 पुनर्विचार याचिकाओं सहित कुल 65 याचिकाएं कोर्ट मे कि गयी हैं।

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चौथा फैसला- कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को माफी पर आना

हम सभी को ज्ञात है कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के “चौकीदार चोर है” बयान पर उनके खिलाफ लंबित अवमानना मामले में उन्हें माफी दिये जाने पर अहम फैसला आना है।

इस मामले में भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कोर्ट का हवाला देकर “चौकीदार चोर है” बयान के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को माफी न दिये जाने की अपील करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि इस बयान पर माफी काफी नहीं है, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सजा मिलनी चाहिए। लेकिन, 2 बार खेद जताने के बाद बिना शर्त माफी मांग चुके कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोर्ट से माफी स्वीकार कर यह केस बंद करने की गुहार लगाई है।

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पांचवां फैसला- लड़ाकू विमान राफेल सौदा

चुनाव के वक्त एक बार फिर बड़ा मुद्दा बना राफेल लड़ाकू विमान पर सौदा का फैसला आना बाकी है। कोर्ट ने 36 राफेल विमानों की खरीदी के सौदे की कोर्ट की निगरानी में जांच कराए जाने की मांग खारिज कर दी थी।

लेकिन, भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विचार याचिका दाखिल कर कोर्ट को चुनौती दी है। इन बडे फेसले के अलावा ‘ट्रिब्युनल एंड फाइनेंस’ एक्ट को चुनौती देने के इस अहम मामले मे भी अभी फैसला आना बाकि है।

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