History of Ayodhya and Faizabad

नवाबों ने बनाया फैजाबाद, योगी राज में कैसे बनी अयोध्या? और अब राम मंदिर

  • 6 नवंबर 2018 को फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या कर दिया गया
  • बाबर के शासन के बाद से धर्मनगरी अयोध्या विवादों में आ गई थी
  • 5 अगस्त वह शुभ दिन है जिस दिन राम मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है

History of Ayodhya & Faizabad: आपको बतादे कि राम मंदिर आंदोलन से ही अयोध्या सुर्खियों का विषय रहा लेकिन दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को बताना पड़ता था कि यहां पर पहुंचें कैसे। लगातार यह कोशिश की जा रही थी कि फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या किया जाए पर इसे तवज्जो नहीं मिल पा रही थी।

History of Ayodhya and Faizabad

लोगो कि अयोध्या नगरी बनने की मुराद पूरी होने जा रही है। सभी संत समाज के साथ ही लोगों में खुशी और उत्साह है। अयोध्या को दिवाली कि तरह सजाया-संवारा जा रहा है। 5 अगस्त वह शुभ दिन है जिस दिन राम मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों मंदिर की आधारशिला रखी जाने वाली है। प्रोग्राम फिक्स हैं। आगंतुकों की लिस्ट तैयार हो चुंकी है।

1. अयोध्या कांड: कैसे शुरु हुआ राम मंदिर और मस्जिद का विवाद..

कोरोना के भायावहक काल में इस प्रोग्राम को तकनीक के माध्यम से बड़ा बनाने की हर सम्भव कोशिशें चरम सिमा पर हैं। देश-विदेश और पूरी मीडिया में अयोध्या की धूम है। लेकिन इस अयोध्या को अपना प्राचिन नाम और प्रतिष्ठा प्राप्त करने में लंबा संघर्ष करना पड़ा है। इसकी कहानी बनती बिगड़ती रही है।

History of Ayodhya & Faizabad

जब राममंदिर का नाम आता है तो अयोध्या सुर्खियों में रहा लेकिन दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को बताना पड़ता था कि यहां पर पहुंचें कैसे। लगातार यह मांग की जा रही थी कि फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या किया जाए पर इसे तवज्जो नहीं मिल पा रही थ। खास बात यह भी है कि फैजाबाद से सांसद रहे विनय कटियार और वर्तमान सांसद लल्लू सिंह भी इस बारे में आवाज उठा चुके थे।

2) अयोध्या कांड: शिया-सुन्नी विवाद, मुस्लिमो का आपस में झगडा…

2017 यह वह समय था जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री। समय ने करवट ली और मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे योगी ने इसे गंभीरता से लिया और 6 नवंबर 2018 को फैजाबाद जिले का नाम बदलकर पुन: अयोध्या कर दिया। CM Yogi adityanaath संतों की यह शिकायत दूर कर दी, जिसमें संत समाज कहते थे कि जिस नगरी में राम का जन्म हुआ अगर हम उसे पहचान तक नहीं दे सकते तो धिक्कार है।

प्राचिन ग्रंथों में है अयोध्या के साक्ष्य

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार ई. पू, 2200 के आसपास अयोध्या की स्थापना हुई थी। भारत का सबसे बडा महाकाव्य रामायण के अनुसार राम का जन्म अयोध्या में हुआ था, इक्ष्वाकु वंश में अयोध्या के राजा दशरथ उनके पिता थे जो 63वें शासक थे। जब भी प्राचीन भारत के तीर्थों-स्थलो का जिक्र होता है तो अयोध्या का नाम जरूर आता है। ‘अयोध्या मथुरा माया काशि कांची ह्य्वान्तिका, पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिका।‘ बौद्ध धर्म कि मान्यताओं अनुसार बुद्ध देव ने अयोध्या अथवा साकेत में 16 सालों तक निवास किया था। रामानंदी संप्रदाय का मुख्य केंद्र अयोध्या ही रहा।

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भारत में जब बाबर के शासनकाल हुआ तो धर्मनगरी अयोध्या को विवादों के घेरेलाकर खडा कर दिया। इस विवाद को लगभग 500 साल हो चुके हैं। ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने यहां मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाई थी, जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना जाता था।

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सरयू सलिल का किनारा और लखनऊ से अयोध्या की करीबी इसे खास तवज्जो दिलाती रही। इस शहर की नींव उस समय रखी गई जब नवाबों का शासन प्रभार पर था। इस शहर की स्थापना बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने की। लेकिन दूसरे नवाब सआदत खान ने फैजाबाद की नींव रखी। सआदत खान के उत्तराधिकारी शुजाउद्दौला ने फैजाबाद को अवध की राजधानी बनाया।

नवाब सफदरजंग ने बनाया सैन्य मुख्यालय

1739 से 1754 तक का वह समय था जब नवाब सफदरजंग ने इसे अपना सैना का मुख्यालय बनाया था। इसके बाद आए शुजाउद्दौला ने फैजाबाद में एक किले का निर्माण कराया। इसके बाद पूरे भारत में फैजाबाद को जाना जाता था। लखनऊ से यह मात्र 130 किमी दूर था और बंगाल से आते समय यह रास्ते में पड़ता था। फैजाबाद को एक समय छोटा कोलकाता भी कहा जाता था।

नवाब शुजाउद्दौला के समय चरमोत्कर्ष पर

शुजाउद्दौला का शासनकाल फैजाबाद के लिए स्वर्णकाल कहा जा सकता है। उस दौरान फैजाबाद ने जो समृद्धि हासिल की वैसी दोबारा नहीं कर सका। उस दौर यहां कई इमारतों का निर्माण हुआ जिनकी निशानियां आज भी मौजूद हैं। शुजाउद्दौला की पत्नी बहू बेगम मोती महल में रहती थीं। और इस महल से पूरे फैजाबाद का भव्य नजारा दिखाई देता था। 1775 में नवाब असफउद्दौला ने अपनी राजधानी फैजाबाद से बदलकर लखनऊ कर ली, इसके बाद यह अपनी रंगत और शौभा खोने लगा।

राम मंदिर आंदोलन से मिली पहचान

राम मंदिर आंदोलन ने अयोध्या को विश्व दृष्ठि मे ला दिया। कहते है वक्त को भी वक्त लगता है वक्त बदलने के लिए” वक्त ने अपना पासा पलटा और अयोध्या के आगे फैजाबाद का अस्तित्व मानो खत्म हो गया। राजनैतिक सियासत का ऐसा दौर चला कि किसी भी सरकार ने अयोध्या के विकास पर ध्यान हि नहीं दिया। अयोध्या की लगातार उपेक्षा होती रही, लेकिन जब मामाला सुप्रीम कोर्ट कि चौखट पर गया और राम मंदिर के संबंध में दिए गए निर्णय ने इसका स्वर्णकाल लौटा दिया है। सरकार ने इसके सौंदर्यीकरण के लिए बड़ी घोषणाएं की हैं। यहां एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है।

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