Chandrayaan-2: Darkness is getting close to Vikram Lander

Chandrayaan-2: विक्रम लैंडर के करीब पहुंच रहा है अंधेरा ! क्या ISRO का सम्पर्क नहीं होगा?

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नमस्कार दोस्तो, बतादे कि कुछ दिन पहले भारत के विज्ञानकोने chandrayaan2 को चांद पर भेजा था। लेकिन कुछ तकनिकि के कारण विक्रम लैंडर ठीक से अपनी जगह नही पहुंच पाया । ओर विक्रम लैंडर महज दक्षिणी ध्रुवसे सिर्फ 2 किमी. दुर रह गया।

Chandrayaan-2: Darkness is getting close to Vikram Lander

दक्षिणी ध्रुव पर अब काली अंधेरी रात होने वाली है. इसके साथ ही इसरो (Indian Space Research Organisation – ISRO) का विक्रम लैंडर से संपर्क करने का सपना भी इसी अंधेरे में गुम हो जाएगा. क्योंकि,कल रात से विक्रम लैंडर उस अंधेरे में खो जाएगा,

महज 13 दिनो की खतरनाक रात मे विक्रम लैंडर…..

 जहां से उससे संपर्क करना तो दूर, उसकी तस्वीर भी नहीं ली जा सकेगी. इसरो ही नहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत दुनिया की कोई भी स्पेस एजेंसी विक्रम लैंडर की तस्वीर तक नहीं ले पाएगा. यही नहीं, 13 दिनों की इस खतरनाक रात में विक्रम लैंडर का सही सलामत रहना बेहद मुश्किल होगा.

चांद के उस हिस्से में सूरज की रोशनी नहीं पड़ेगी, जहां विक्रम लैंडर है. तापमान  घटकर माइनस 183 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. इस तापमान में विक्रम लैंडर के इलेक्ट्रॉनिक हिस्से खुद को जीवित नहीं रख पाएंगे. अगर, विक्रम लैंडर में रेडियोआइसोटोप हीटर यूनिट लगा होता तो वह खुद को बचा सकता था. क्योंकि, इस यूनिट के जरिए इसे रेडियोएक्टिविटी और ठंड से बचाया जा सकता था. यानी, अब विक्रम लैंडर से संपर्क साधने की सारी उम्मीदें खत्म होती दिख रही है.

 

विक्रम लैंडर से जुड़ी कुछ जानकारी

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (Indian Space Research Organisation – ISRO) के विज्ञानकोने बताया कि 20-21 सितंबर के बाद विक्रम लैंडर से जुड़ी जानकारी और तस्वीरें आम लोगों के लिए जारी कर सकता है. हालांकि, इसरो ने यह नहीं बताया है कि ये विक्रम लैंडर से जुड़ी जानकारियां और तस्वीरें कब तक जारी करेगा. लेकिन ये बात जरूर कही है कि हम सारी जानकारियां लोगों को बताएंगे और इसे सोशल मीडिया पर भी जारी करेंगे. बता दें कि 17 सितंबर को इसरो ने ट्वीट कर लिखा है कि हमारे साथ खड़ा होने के लिए आप सभी का धन्यवाद. हम दुनिया भर में भारतीयों की आशाओं और सपनों से प्रेरित होकर आगे बढ़ते रहेंगे।

7 सितंबर को तड़के 1.50 बजे के आसपास विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर गिरा था. जिस समय चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चांद पर गिरा, उस समय वहां सुबह थी. यानी सूरज की रोशनी चांद पर पड़नी शुरू हुई थी. चांद का पूरा दिन यानी सूरज की रोशनी वाला पूरा समय पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है. यानी 20 या 21 सितंबर को चांद पर रात हो जाएगी ।

20-21 सितंबर को होने वाली रात

13 दिन काम करने का मिशन लेकर गए विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर के मिशन का टाइम पूरा हो जाएगा. आज 19 सितंबर है, यानी चांद पर 20-21 सितंबर को होने वाली रात से करीब 3 घंटे पहले का वक्त. यानी, चांद पर शाम हो चुकी है. हमारे कैलेंडर में जब 20 और 21 सितंबर की तारीख होगी, तब चांद पर रात का अंधेरा छा चुका होगा.

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