भारत रत्न प्रणव मुखर्जी के युवाओ, राजनीति के लिए quotes in hindi

Pranab Mukherjee Quotes: आप सभी जानते है कि भारत के पुर्व राष्ट्रपति प्रणव कुमार मुखर्जी का जन्म 11 दिसम्बर 1935 को पश्चिम बंगाल के किरनाहर शहर में स्थित मिराती गाँव वीरभूम जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम कामदा किंकर मुखर्जी और माता का नाम राजलक्ष्मी मुखर्जी है।  वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं।

प्रणव कुमार मुखर्जी ने अपनी शिक्षा वीरभूम में कि और इतिहास व राजनीति विज्ञान में कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर किया। प्रणव मुखर्जी ने राजनीति में आने से पूर्व वे एक कॉलेज प्राध्यापक और एक पत्रकार रह चुके है। इन्होने बाँग्ला प्रकाशन मातृभूमि की पुकार में भी काम किया है। प्रणव मुखर्जी ने  25 जुलाई 2012 को भारत के तेरहवें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। आइए आज हम आपको  बताते है प्रणव मुखर्जी  के 10 बडे अनमोल सुविचार जो उन्होने जनता को सम्बोधित  करते हुए कहे थे। तो चलिए जानते है भारत रत्न प्रणव मुखर्जी के quotes in hindi.

Pranab mukherjee quotes in hindi

  1. पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘‘हमें अपने सार्वजनिक विमर्श को सभी प्रकार के भय एवं हिंसा, भले ही वह शारीरिक हो या मौखिक, से मुक्त करना होगा।
  2. मुखर्जी ने देश के वर्तमान हालात का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘प्रति दिन हम अपने आसपास बढ़ी हुई हिंसा देखते हैं. इस हिंसा के मूल में भय, अविश्वास और अंधकार है|
  3. मुखर्जी ने कहा कि असहिष्णुता से भारत की राष्ट्रीय पहचान कमजोर होगी. उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्रवाद सार्वभौमवाद, सह अस्तित्व और सम्मिलन से उत्पन्न होता है|
  4. उन्होंने राष्ट्र की परिकल्पना को लेकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों का भी हवाला दिया. उन्होंने स्वतंत्र भारत के एकीकरण के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों का भी उल्लेख किया|
  5. मुखर्जी ने कहा, ‘‘भारत में हम सहिष्णुता से अपनी शक्ति अर्जित करते हैं और अपने बहुलतावाद का सम्मान करते हैं| हम अपनी विविधता पर गर्व करते हैं| पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस कार्यकर्ताओं के साथ राष्ट्र, राष्ट्रवाद एवं देशप्रेम को लेकर अपने विचारों को साझा किया|
  6. उन्होंने प्राचीन भारत से लेकर देश के स्वतंत्रता आंदोलत तक के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्रवाद ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तथा ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:..’ जैसे विचारों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रवाद में विभिन्न विचारों का सम्मिलन हुआ है| उन्होंने कहा कि घृणा और असहिष्णुता से हमारी राष्ट्रीयता कमजोर होती है|
  7. मुखर्जी ने राष्ट्र की अवधारणा को लेकर सुरेन्द्र नाथ बनर्जी तथा बालगंगाधर तिलक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा राष्ट्रवाद किसी क्षेत्र, भाषा या धर्म विशेष के साथ बंधा हुआ नहीं है|
  8. पूर्व राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे लिए लोकतंत्र सबसे महत्वपूर्ण मार्गदशर्क है| उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रवाद का प्रवाह संविधान से होता है. ‘भारत की आत्मा बहुलतावाद एवं सहिष्णुता में बसती है|
  9. उन्होंने कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ही लोगों की प्रसन्नता एवं खुशहाली को राजा की खुशहाली माना था| पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने सार्वजनिक विमर्श को हिंसा से मुक्त करना होगा| साथ ही उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र के रूप में हमें शांति, सौहार्द्र और प्रसन्नता की ओर बढ़ना होगा|
  10. मुखर्जी ने कहा कि हमारे राष्ट्र को धर्म, हठधर्मिता या असहिष्णुता के माध्यम से परिभाषित करने का कोई भी प्रयास केवल हमारे अस्तित्व को ही कमजोर करेगा|
Bharat Ratn Pranab mukherjee quotes

bharat ratna pranab mukherjee कि प्रेरणा

  • कभी कभी समझौता बुरा नहीं होता; कभी कभी पूर्ण सत्ता से समस्याएं पैदा होती है। एक पुरानी कहावत है कि “सत्ता भ्रष्ट करती है और पूर्ण सत्ता पूर्णतः भ्रष्ट करती है।”
  • जहां भी मेरी भाग्य ने मुझे पहुंचाया है; मैं उस ऊंचाई पर खुश हूं।
  • हम सभी को हर चीज की एक कीमत चुकानी होती है।
  • एक आधुनिक राष्ट्र का निर्माण कुछ आवश्यक मूल तत्वो–प्रत्येक नागरिक के लिए लोकतंत्र अथवा समान अधिकार, प्रत्येक पंथ के लिए निरपेक्ष अथवा समान स्वतंत्रता, प्रत्येक प्रांत की समानता तथा आर्थिक समता पर होती है।
  • मैं कोई विरासत नहीं छोड़ना चाहता क्योंकि यह लोकतंत्र है। लोकतंत्र एक समूह है जो मैं इस समूह का हिस्सा हूं। मैं इस समूह में भूल जाऊंगा। हवा में घुल जाऊंगा। मैं लोगों के बीच रहना चाहूंगा, मैं कोई विरासत नहीं छोडूंगा।
  • विकास को वास्तविक बनाने के लिए देश के सबसे गरीब को यह महसूस होना चाहिए कि वह राष्ट्रीय गाथा का एक भाग है।
  • जितना मैंने दिया है उससे कहीं अधिक; मुझे इस देश के लोगों और संसद से मिला है।
  • जैसे-जैसे व्यक्ति की आयु बढ़ती है; उसके उपदेश देने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है परंतु मेरे पास देने के लिए कोई उपदेश नहीं है।

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  • पिताजी ने मुझे आत्म सम्मान का मूल्य सिखाते हुए, इसे बनाए रखने का महत्व समझाया था।
  • पिछले 50 वर्षों के सार्वजनिक जीवन के दौरान भारत का संविधान मेरा पवित्र ग्रंथ रहा है।
  • हमें गरीब से गरीब व्यक्ति को सशक्त बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी नीतियों के फायदे पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
  • भारत की संसद मेरे  दिल मे रहा है और भारत की जनता की सेवा मेरा अभिलाषा रही है।
  • एक स्वस्थ, खुशहाल और सार्थक जीवन प्रत्येक नागरिक का बुनियादी अधिकार है।
  • भारत की आत्मा, बहुलवाद और सहिष्णुता में बसती है। भारत केवल एक भौगोलिक सत्ता नहीं है। जिसमें विचारों, दर्शन, बौद्धिकता, औद्योगिक प्रतिभा, शिल्प, नवान्वेषण और अनुभव का इतिहास शामिल है।
  • खुशहाली मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • सदियों के दौरान, विचारों को आत्मसात करके हमारे समाज का बहुलवाद निर्मित हुआ है।
  • खुशहाली समान रूप से आर्थिक और गैर आर्थिक मानदंडों परिणाम है। खुशहाली का लक्ष्य सतत विकास के उस लक्ष्य के साथ मजबूती से बधा हुआ है जो मानव बेहतरी, समाज मे समावेशन और पर्यावरणीय स्थिरता का मिश्रण है।
  • संस्कृति, पंथ और भाषा की विविधता में भारत को विशेष बनाती है।
  • शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जो भारत को अगले स्वर्ण युग में ले जा सकता है। शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति से समाज को पुनर्व्यवस्थित किया जा सकता है। इसके लिए हमें अपने उच्च संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाना होगा।
  • हमें सहिष्णुता से शक्ति प्राप्त होती है। यह शताब्दियों से हमारी सामूहिक चेतना का अंग रही है।
  • जनसंवाद के विभिन्न पहलू हैं हम तर्क वितर्क कर सकते हैं। हम सहमत हो सकते हैं या हम सहमत नहीं हो सकते हैं, परंतु हम विविध विचारों की आवश्यक मौजूदगी को नहीं नकार सकते; अन्यथा हमारी विचार प्रक्रिया का मूल स्वरूप नष्ट हो जाएगा।
  • हमारी शिक्षा प्रणाली द्वारा रुकावटों को सामान्य घटना के रूप में स्वीकार करना चाहिए और विद्यार्थियों को रुकावटों से निपटने और आगे बढ़ने के लिए तैयार करना चाहिए।
  • सहृदयता और सहानुभूति की क्षमता हमारी सभ्यता की सच्ची नीव है।
  • हमारे विश्वविद्यालयों को रटकर याद करने वाला स्थान नहीं बल्कि जिज्ञासु व्यक्तियों का सभास्थल बनाया जाना चाहिए।
  • प्रतिदिन हम अपने आसपास बढ़ती हुई हिंसा देखते हैं। इस हिंसा की जड़ में अज्ञानता,भय और अविश्वास है।

  • हमारे लिए समावेशी समाज का निर्माण विश्वास का एक विषय होना चाहिए।
  • हमें अपने जनसंवाद को शारीरिक और मौखिक सभी तरह की हिंसा से मुक्त करना होगा।
  • गांधी जी भारत को एक ऐसे समावेशी राष्ट्र के रूप में देखते थे; जहां आबादी का प्रत्येक वर्ग समानता के साथ रहता हो और समान अवसर प्राप्त करता हो। चाहते थे कि हमारे लोग एकजुट होकर निरंतर व्यापक हो रहे विचारों और कार्यों की दिशा में आगे बढ़ें।
  • एक अहिंसक समाज ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोगों के सभी वर्गों विशेषकर पिछड़ी और वंचितो की भागीदारी सुनिश्चित कर सकता है।
  • गरीबी मिटाने से खुशहाली में भरपूर तेजी आएगी।
  • हमें एक सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए अहिंसा की शक्ति को पुनर्जागरत करना होगा।
  • सुशासन से लोग पारदर्शिता, जवाबदेही और सहभागी राजनीतिक संस्थाओं के माध्यम से अपना जीवन सवार पाएंगे।
  • पर्यावरण की सुरक्षा हमारे अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है। प्रकृति हमारे प्रति पूरी तरह उदार रही है परंतु जब लालच आवश्यकता की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रकृति अपना प्रकोप दिखाती है।
  • भारत हम में से हर एक से यह अपेक्षा रखता है कि राष्ट्र निर्माण की इस जटिल कार्य में हम जो भी भूमिका निभा रहे हैं, उसे हम ईमानदारी, समर्पण और हमारे संविधान में स्थापित मूल्यों के प्रति दृढ़ निष्ठा के साथ निभाएं।
  • कल, जब मैं आपसे बात करूंगा तो राष्ट्रपति के रुप में नहीं बल्कि आपकी तरह एक ऐसे नागरिक के रूप में बात करुंगा; जो महानता की दिशा में, भारत की प्रगति के पथ का एक यात्री है।
  • मैं उस ऊंचाई पर सहज महसूस करता हूं जहाँ भाग्य आपको रखती है|
  • कोई भी समस्या कभी भी हिंसा से हल नहीं हुई है. यह हरफ तरफ सिर्फ चोट और दर्द पहुंचाता है|
  • भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर की सरकार हर कश्मीरी की गरिमा के लिए समान अधिकार और समान अवसर देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है|
  • भारतीयों के रूप में, हमें निश्चित रूप से अतीत से सीखना चाहिए। लेकिन, हमें भविष्य पर ध्यान केंद्रित रहना चाहिए। मेरे विचार से, शिक्षा वह वास्तविक रस-विधा है जो भारत को अपने अगले स्वर्ण युग में ला सकता है|

  • भूख से ज्यादा अपमानजनक कोई और अपमान नहीं है|
  • 18वीं सदी के भारत में यूरोपीय उपनिवेशवाद का उदय शुरू हुआ, तब जो ‘जय हिंद’ की क्रांतकारी गूंज हुई वह 1947 में अपने अंत का संकेत है|
  • भारत के युवा लोगों एक मजबूत और शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करेंगे जो राजनीतिक रूप से परिपक्व और आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र होगा, जिसमे राष्ट्र के लोग उच्च गुणवत्ता का जीवन और न्याय दोनों का आनंद ले सके।
  • भारत वह देश है जहाँ बहुत गरीबी है ; भारत एक आकर्षक, उत्थान सभ्यता है जो सिर्फ हमारे शानदार कला में ही नहीं निखरती बल्कि हमारे शहर और गांव के रचनात्मकता और हमारे दैनिक जीवन की मानवता में भी निखर उठती है|
  • मुझे यह लगता है की जब संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की जगह लेने के लिए और सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में विस्तार किया जाएगा, तब इसमें भारत की जगह भी जरुर होगी. मैं आशा करता हूँ, लेकिन पहले यह विस्तार किया तो जाये|
  • हमारा संघीय संविधान, आधुनिक भारत के विचार का प्रतीक हैं : यह न केवल भारत को ही बल्कि आधुनिकता को भी परिभाषित करता है|
  • सम्पूर्ण भारत सिर्फ भारत के लिए बना है, और समृद्धि के उच्च पद पर बैठने की इच्छा से प्रेरित है. यह अपने मिशन में आतंकी गतिविधियों द्वारा भी नही हटेगा|
  • हमारी पीढ़ी में, हमारे रोल मॉडल गांधी और नेहरू थे|  वे प्रतिष्ठित है. वे व्यक्तित्व की पूजा अर्चना करते थे. मैंने नेहरू जी के लगभग हर भाषण पढ़ा है|

  • भारतीय राष्ट्रपति नीति निर्धारित नहीं करता है| यहां राष्ट्रपति नीति निर्माता नहीं है. राष्ट्रपति के नाम में, मंत्रिमंडल नीतिगत निर्णय लेता है|
  • मैं व्यक्तिगत रूप से यह विश्वास करता हूँ की भारत के राष्ट्रपति का पद मांग करने के लिए नहीं है. यह तो पेशकश की जा रही है|
  • टीचिंग मेरे लिए छात्र जीवन से निकलकर श्रमिक जीवन की और पलायन था. उन दिनों में, हमारी शिक्षा प्रणाली थोड़ी अलग थी| प्रत्येक कक्षा में छात्रों की संख्या बहुत ज्यादा होती थी. राजनीति विज्ञान सामान्य, जिसे मैंने भी पढ़ा, उसमे छात्रो की संख्या 100 के आसपास थी|
  • हमारी माँ के लिए हम सभी बच्चे समान है, और भारत सभी से यह पूछ रहा है की हम इस राष्ट्र निर्माण के जटिल नाटक में अपनी कौन सी भूमिका निभा रहे है , हमारा कर्तव्य है की हम हमारे संविधान में प्रतिष्ठापित मूल्यों के प्रति निष्ठा व प्रतिबद्धता रखे|

उम्मिद करते है कि आप सभी को bharat ratna pranab mukherjee के Pranab mukherjee quotes in hindi अच्छे लगे होंगे।

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